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27 May 2012

इक इल्तज़ा है तुमसे... के मेरे दोस्त बन जाओ..

इक इल्तज़ा है तुमसे...
के मेरे दोस्त बन जाओ,
और मुझे महोब्बत न करो.....

ये तमन्ना है के,
मेरी ज़िन्दगी में आओ..
और मुझे महोब्बत न करो.......॥

सिवा तुम्हारे कुछ सोचूँ मैं नहीं
सोचता हूँ बता दूं
मगर रूबरू जब तुम हो..
तो कुछ बोलूं मैं नहीं...

काश ऐसा हो के..
मैं तुम, तुम मैं बन जाओ
और मुझे महोब्बत ना करो......॥

अक्सर देखा है..
महोब्बत को नाकाम होते हुए
साथ जीने के वादे किए..
फिर तनहा रोते हुए......

जो हमेशा साथ निभाए..
वो तो बस दोस्ती है
जो कभी ना रूलाए..
वो तो बस दोस्ती है........

यूँ ही देखा है..
बचपन की दोस्ती को बूढा होते हूए
ना किए कभी वादे..
पर हर वादे को पूरा होते हूए...॥

ये तमन्ना है के मेरी ज़िन्दगी में आओ
और मुझे महोब्बत न करो...
ये इल्तज़ा है के मेरे दोस्त बन जाओ
और मुझे महोब्बत न करो......॥

-
Unknown.

11 May 2012

પ્રસિધ્ધિ

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પ્રસિધ્ધિની ખરી સાબિતી એ જ છે 'દર્શિત'
કે ન હોવ ત્યાં પણ ચર્ચા તમારી થતી રહે..

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3 April 2012

है कुबुल..

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है इस कदर हारे
इस दिल से दर्शित
की अब तो उनकी हर शिकायत कुबुल..
हर गुनाह है कुबुल..
कभी वो हमारे साथ थे
कभी सारां जहां आसपास था
अब है सिर्क तनहाई
वो भी तो कुबुल

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16 March 2012

तेरा बीछडना..

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मीलने के बाद तेरा बीछड जाना आज भी नही भुला है दर्शित,
दिन तो वो अच्छे थे जब सपनेमें ही मुलाकाते होती रहेती थी..

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9 March 2012

राझ

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दिल तो तुने खोल के रख दीया उनके सामने 'दर्शित'
जिन्हें सिर्फ ये देखना था की राझ उसमें कीतने छुपे है

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5 March 2012

छोटी छोटी चित्तरायीं यादें..

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छोटी छोटी चित्तरायीं यादें..
बीछी पडी है लम्हों की लौन पर..
नंगे पैर उनपे चलते-चलते
इतनी दुर आ गये है,
की अब भुल गये है जुते कहां उतारे थे...

एडी कोमल थी जब आयें थे,
थोडी सी नाजुक है अभी भी..
और नाजुक ही रहेगी,
इन खट्टी-मीठी यादों की शरारत..
जब तक इन्हें गुदगुदाती रहेगी....
सच... भुल गये है जुते कहां उतारे थे...

पर लगता है की.. अब उनकी जरूरत नही.....!!

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- Written By Amitabh Bhattacharya

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2 March 2012

प्यार का मजा..

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प्यार में होने का यही तो एक मजा है 'दर्शित'
की वक्त गुजर जाता है और पता नही चलता..

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खुशी..

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तुने तो हर वक्त चाहा की वो खुश रहे 'दर्शित'
जीसने तुज्हे कभी 'खुश रहो' कहा तक नही..

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